मां की हत्या के दोषी पुत्र को उम्रकैद, शाहपुरा कोर्ट का बड़ा फैसला


शाहपुरा न्यायालय ने मां की हत्या के मामले में पुत्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई

शाहपुरा, 25 जून।मूलचन्द पेसवानी। अपनी ही मां की हत्या के मामले में शाहपुरा न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त पुत्र को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी माना।

यह मामला वर्ष 2023 में थाना शाहपुरा क्षेत्र के ग्राम रहड़ में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है। मामले के अनुसार अभियुक्त रुस्तम पुत्र मोहम्मद अली पर अपनी मां शाहनाज बानो की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप था। घटना के बाद मृतका के भाई मकबूल मोहम्मद ने थाना शाहपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए हत्या का आरोप परिवारजनों पर लगाया था।

एफआईआर दर्ज होने के बाद शुरू हुई जांच

प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर संख्या 208/2023 दर्ज कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न साक्ष्य एकत्र किए और मामले से जुड़े तथ्यों की गहन पड़ताल की।

अनुसंधान में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मृतका के पुत्र रुस्तम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 34 के तहत आरोप पत्र तैयार कर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, शाहपुरा न्यायालय में प्रस्तुत किया। बाद में मामला विचारण के लिए सत्र न्यायालय को भेजा गया।

26 गवाहों और 32 दस्तावेजों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक हितेष शर्मा ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए तथा 32 महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए।

अदालत ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियुक्त रुस्तम ही अपनी मां शाहनाज बानो की हत्या का दोषी है।

आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये का अर्थदंड

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सानिया हाशमी ने अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने अभियुक्त रुस्तम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय के आदेश के अनुसार दोषी को निर्धारित दंड भुगतना होगा।

न्यायालय के फैसले का महत्वपूर्ण संदेश

यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले में सजा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों के मामलों में कानून अपना कार्य निष्पक्षता के साथ करता है।

न्यायालय का यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता, विधि के शासन और अपराध के विरुद्ध कानून की दृढ़ता को दर्शाता है।

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