लोकतंत्र सेनानी दयाराम मेठानी से मिले सांसद दामोदर अग्रवाल


भीलवाड़ा में सांसद दामोदर अग्रवाल ने लोकतंत्र सेनानी दयाराम मेठानी से मुलाकात कर आपातकाल, भारत-पाक विभाजन और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की

भीलवाड़ा।मूलचन्द पेसवानी। लोकतंत्र सेनानी दयाराम मेठानी से शनिवार को भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल ने उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने न केवल उनका कुशलक्षेम जाना, बल्कि लोकतंत्र, संगठन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा भी की। यह मुलाकात राजनीतिक औपचारिकता से आगे बढ़कर अनुभव, संघर्ष और विचारों के आदान-प्रदान का प्रेरणादायी अवसर बन गई।

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा : सांसद

सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी ने बताया कि मुलाकात के दौरान सांसद दामोदर अग्रवाल ने दयाराम मेठानी के लंबे राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के अनुभवों को गंभीरता से सुना और संगठन के प्रति उनके योगदान की सराहना की।

सांसद ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता केवल पार्टी के स्तंभ ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक दीपस्तंभ हैं। उनका संघर्ष, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा युवा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

भारत-पाक विभाजन की स्मृतियां कीं साझा

बैठक के दौरान माहौल उस समय भावुक हो गया जब दयाराम मेठानी ने भारत-पाक विभाजन के दौर की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष की कहानी भी था।

उन्होंने उस दौर के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रीय संघर्षों का उल्लेख करते हुए उपस्थित लोगों को इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय से रूबरू कराया।

19 माह जेल में रहे, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प नहीं डिगा

चर्चा के दौरान देश में लगे आपातकाल का भी उल्लेख हुआ। दयाराम मेठानी ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में उन्हें करीब 19 माह तक जेल में रहना पड़ा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनके संकल्प में कभी कमी नहीं आई।

उन्होंने कहा कि जेल की सलाखें विचारों को कैद नहीं कर सकतीं। लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करना उनका कर्तव्य था, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया।

आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय : दामोदर अग्रवाल

सांसद दामोदर अग्रवाल ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों ने जिस साहस और त्याग का परिचय दिया, वही आज देश की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान से नहीं, बल्कि उन लोगों के बलिदान से होती है जो संकट के समय सत्य और स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े रहते हैं।

वरिष्ठ नेताओं का अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर

सांसद ने दयाराम मेठानी के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को अनुकरणीय बताते हुए उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर मेठानी, सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी, कल्पेश चौधरी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मुलाकात ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

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