शाहपुरा में मजबूत होंगी रोजगारोन्मुखी योजनाएं, विकसित भारत 2047 पर मंथन


दिल्ली में आयोजित कौशल विकास कार्यशाला में विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने भाग लेकर युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और विकसित भारत 2047 के विजन पर विचार साझा किए

शाहपुरा।मूलचन्द पेसवानी। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में कौशल विकास को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से एनएफपीआरसी फाउंडेशन द्वारा सांसदों और विधायकों के लिए आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने सहभागिता की। कार्यशाला में युवाओं के भविष्य, कौशल विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई।

तरुण चुग ने दिया विकसित भारत 2047 का मंत्र

कार्यशाला के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन को केंद्र में रखते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति बनाने के लिए केवल नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि एक कुशल, प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर युवा शक्ति की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में उद्योगों की मांग तेजी से बदल रही है। ऐसे में युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि युवा उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होंगे तो भारत के विकास को और अधिक गति मिलेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल स्किल्स पर विशेष जोर

कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल दक्षता, स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार और रोजगारपरक प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी, इसलिए युवाओं को नई तकनीकों के साथ जोड़ना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल स्किल्स, उद्यमिता और नवाचार आधारित सोच युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला भी बना सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर नए अवसरों का सृजन होगा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण युवाओं तक कौशल विकास योजनाएं पहुंचाने पर चर्चा

कार्यशाला में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना आवश्यक है। देश में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा अवसरों के अभाव में अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाते।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

शाहपुरा के युवाओं को मिलेगा लाभ : डॉ. लालाराम बैरवा

कार्यशाला में अपने विचार रखते हुए शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी रहा। उन्होंने कहा कि यहां प्राप्त सुझाव, अनुभव और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि शाहपुरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा मौजूद हैं, जिन्हें केवल सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर की आवश्यकता है। यदि इन युवाओं को आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

युवाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर रहेगा फोकस

डॉ. बैरवा ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त नवाचारों और कौशल विकास से जुड़े विचारों को अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा सशक्तिकरण केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष, नवाचारी और आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही आवश्यक है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा वर्ग मजबूत, प्रशिक्षित और अवसरों से संपन्न होगा।

स्थानीय विकास का रोडमैप बनी कार्यशाला

शाहपुरा विधायक ने कहा कि वे अपने क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार सृजन और युवा सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्यरत रहेंगे। उनकी प्राथमिकता रहेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक युवा को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिले।

यह कार्यशाला केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रही, बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए एक ऐसा रोडमैप लेकर आई, जो स्थानीय स्तर पर विकास की नई संभावनाओं को जन्म दे सकता है। यदि कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण पर गंभीरता से कार्य किया गया तो विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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