मोहर्रम पर शाहपुरा में देशवाली और कायमखानी समाज के ताजियों का भव्य जुलूस निकला, बालाजी छतरी पर दोनों ताजियों का भावपूर्ण मिलन हुआ
शाहपुरा।मूलचन्द पेसवानी। मोहर्रम पर्व पर शुक्रवार को शाहपुरा शहर अकीदत, गम और भाईचारे के रंग में रंगा नजर आया। त्याग, बलिदान, सब्र और इंसानियत का पैगाम देने वाले इस पर्व पर शहर में दो प्रमुख ताजिए निकाले गए। एक ताजिया देशवाली समाज का था, जबकि दूसरा कायमखानी समाज का। दोनों ताजियों के जुलूस ने धार्मिक आस्था के साथ सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
सुबह से दिखी मोहर्रम की रौनक, जगह-जगह हुई छबील और शरबत सेवा
सुबह से ही शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों सहित प्रमुख मार्गों पर मोहर्रम को लेकर विशेष रौनक दिखाई दी। युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों में उत्साह का माहौल रहा। जगह-जगह छबील, शरबत और ठंडे पेय की व्यवस्था की गई, जहां सभी धर्मों के लोगों ने सेवा भाव से भागीदारी निभाई। शाहपुरा की गंगा-जमुनी तहजीब इस आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
देशवाली समाज का ताजिया बालाजी छतरी पहुंचा
दोपहर बाद देशवाली समाज का ताजिया मोहर्रम के चबूतरे से रवाना हुआ। जैसे ही ताजिया आगे बढ़ा, “या हुसैन” की सदाओं और मातमी धुनों के बीच युवाओं का उत्साह देखने लायक था। जुलूस निर्धारित मार्गों से होता हुआ बालाजी की छतरी पहुंचा, जहां पहले से बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
बालाजी की छतरी पर युवाओं ने पारंपरिक हाईदोश खेलते हुए शानदार अखाड़ा प्रदर्शन किया। लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक करतबों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। दर्शकों ने तालियों और नारों के साथ युवाओं का उत्साहवर्धन किया।
कायमखानी समाज का ताजिया भी पहुंचा बालाजी छतरी
इसी दौरान कायमखानी समाज का ताजिया दिलकुशाल बाग से रवाना हुआ। “या अली, या हुसैन” की सदाओं और मातमी नगाड़ों की गूंज के बीच जुलूस आगे बढ़ता गया। मार्ग में बड़ी संख्या में लोग ताजिए के दीदार के लिए उमड़ पड़े।
बालाजी की छतरी पर दोनों ताजियों का भावपूर्ण मिलन हुआ, जिसे पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण माना गया। इस दौरान युवाओं ने पारंपरिक अखाड़ा प्रदर्शन, हाईदोश और मातमी खेल प्रस्तुत कर माहौल को ऊर्जावान बना दिया।
राजपरिवार के शाही महलों के चौक से भी निकला ताजिया
आयोजन के दौरान शाहपुरा राजपरिवार के शाही महलों के चौक से भी ताजिया निकाला गया। इससे आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ गई। बड़ी संख्या में युवा इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
रास्तेभर हुई सेवा, शरबत और ठंडे पेय का वितरण
जुलूस मार्ग पर विभिन्न संगठनों, स्थानीय नागरिकों और मुस्लिम समाज द्वारा छबील, शरबत तथा ठंडे पेय का वितरण किया गया। भीषण गर्मी के बीच यह सेवा लोगों के लिए राहत का कारण बनी। बालाजी की छतरी पर भी विशेष रूप से ठंडे पेय और जल सेवा की व्यवस्था की गई। आयोजन के दौरान सेवा, समर्पण और इंसानियत की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कर्बला शरीफ में पूरी हुई मोहर्रम की रस्में
शाम ढलते-ढलते दोनों ताजिए कर्बला शरीफ की ओर रवाना हुए। देशवाली समाज का ताजिया सुल्तान शाह की बावड़ी में ठंडा किया गया, जबकि कायमखानी समाज का ताजिया कुंड गेट स्थित बावड़ी में ठंडा किया गया। ताजियों के ठंडे होने के साथ ही मोहर्रम की रस्में संपन्न हुईं और माहौल गमगीन हो गया।
पुलिस प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। जुलूस मार्गों पर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। वहीं नगर पालिका द्वारा सफाई, प्रकाश और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासन की सतर्कता के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
मोहर्रम के अवसर पर शाहपुरा में निकले ताजियों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि हुसैनियत केवल इतिहास नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, करुणा और भाईचारे की जीवंत चेतना है। इस संदेश के साथ शाहपुरा ने एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द, प्रेम और सामाजिक एकता की मिसाल कायम की।
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Bhilwara, Rajasthan
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