बारा में पानी का संकट और पलायन, कागजों पर विकास जमीन पर परेशानी


तीन भागों की ग्राउंड रिपोर्ट का अंतिम अंक, यमुना किनारे पेयजल और सिंचाई संकट के साथ स्थानीय रोजगार की कमी पर उठे सवाल

प्रयागराज। बारा विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावों और जमीनी हालात के बीच अंतर को लेकर प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट सीरीज ‘कागजों पर चमकता बारा, जमीन पर तरसता बारा’ का तीसरा और अंतिम भाग पानी के संकट और युवाओं के पलायन पर केंद्रित है। सीरीज के पहले भाग में सड़क और दूसरे भाग में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को उठाया गया था। अंतिम भाग में पेयजल, सिंचाई और स्थानीय रोजगार की कमी को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, यमुना नदी के किनारे बसे बारा क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीण पेयजल और सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।

यमुना किनारे बसे गांवों में भी पेयजल संकट

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जसरा और शंकरगढ़ ब्लॉक के कई गांवों में जल निगम की पाइपलाइन बिछाने और पानी की टंकियां बनाने के बावजूद घरों तक नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, हैंडपंपों का जलस्तर नीचे जाने से गर्मियों में पेयजल संकट और गंभीर हो जाता है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ गांवों में महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर दूर से पानी लाना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने सवाल है कि जब जलापूर्ति योजनाओं पर काम हुआ है, तो घरों के नलों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा।

खेतों तक नहीं पहुंच रहा सिंचाई का पानी

बारा क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को उठाते हुए रिपोर्ट में नहरों में सिल्ट जमा होने, अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने और बोरिंग से जुड़ी दिक्कतों का जिक्र किया गया है। किसानों के अनुसार, बिजली कटौती के कारण सिंचाई के लिए मोटर चलाना भी मुश्किल हो जाता है।

एक किसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना नदी पास होने के बावजूद खेतों में पानी की कमी बनी हुई है। किसानों के सामने सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ खेतों तक पहुंचाने की चुनौती है।

स्थानीय रोजगार की कमी से बढ़ रहा पलायन

रिपोर्ट का एक प्रमुख मुद्दा युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना है। इसमें दावा किया गया है कि शंकरगढ़ का पत्थर उद्योग मंदा पड़ने के बाद स्थानीय रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। वहीं, मनरेगा के तहत भी पर्याप्त काम नहीं मिलने की शिकायतें सामने रखी गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की कमी के कारण युवाओं को अपने गांव और परिवार छोड़कर बाहर जाना पड़ रहा है।

मुंबई मजदूरी करने जा रहा अमन

ग्राउंड रिपोर्ट में जसरा रेलवे स्टेशन पर मिले 22 वर्षीय अमन का उदाहरण दिया गया है, जो मजदूरी के लिए मुंबई जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, अमन ने स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिलने और खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होने को बाहर जाने की वजह बताया।

अमन जैसे युवाओं के सामने परिवार का खर्च चलाने और नियमित आमदनी जुटाने की चुनौती है। रोजगार के लिए पलायन करने वाले युवाओं के परिवारों को भी उनके दूर रहने की परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है।

रिपोर्ट में इस पलायन को केवल रोजगार की समस्या नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर बेहतर भविष्य की संभावनाओं से जुड़ा सवाल बताया गया है।

बारा को घोषणाओं से आगे जमीनी समाधान की जरूरत

तीन भागों की इस ग्राउंड रिपोर्ट के निष्कर्ष में बारा क्षेत्र की पांच प्रमुख जरूरतें सामने रखी गई हैं।

  1. टिकाऊ सड़कें: ऐसी सड़कें जो बरसात में क्षतिग्रस्त न हों।
  2. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता और चौबीस घंटे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं।
  3. पर्याप्त शिक्षक: स्कूलों में सभी जरूरी शिक्षकों की उपलब्धता।
  4. नियमित पेयजल आपूर्ति: घरों में नल कनेक्शन के साथ पर्याप्त पानी की उपलब्धता।
  5. स्थानीय रोजगार: युवाओं के लिए क्षेत्र में ही रोजगार और कौशल विकास के अवसर।

जनता के सवालों पर जवाबदेही की मांग

रिपोर्ट में कहा गया है कि बारा क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सिंचाई और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव है।

आगामी चुनावों के संदर्भ में रिपोर्ट ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, क्षेत्र में पानी की उपलब्धता, रोजगार और सरकारी योजनाओं की स्थिति से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित विभागों के आंकड़ों और अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट के अंत में ‘विद्रोही सामना’ की ओर से बारा के विभिन्न ब्लॉकों में जनता की चौपाल आयोजित करने की बात कही गई है। साथ ही क्षेत्र के लोगों से अपने गांव की समस्याओं से जुड़े फोटो और वीडियो साझा करने की अपील की गई है।

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