हॉस्टल के बच्चों की जिम्मेदारी को राजनीति से अधिक जरूरी बताया, बोले बच्चों के माता-पिता का भरोसा नहीं तोड़ सकता
सवाई माधोपुर। पंचायत समिति चुनाव के बीच जहां टिकट पाने के लिए दावेदारों की कतार लगी हुई है, वहीं दीपक सिंह गुर्जर ने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने से इनकार कर राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। उन्होंने हॉस्टल में रह रहे बच्चों की जिम्मेदारी को चुनाव लड़ने से अधिक जरूरी बताते हुए टिकट लेने से साफ मना कर दिया।
दीपक सिंह गुर्जर धर्मपुरी गांव निवासी हैं, जो खंडार पंचायत समिति की दौलतपुरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। उनका संबंधित वार्ड वार्ड नंबर 12 है, जहां पंचायत समिति सदस्य की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई है।
टिकट के लिए लगातार आ रहे थे फोन
दीपक सिंह गुर्जर ने सोशल मीडिया पर लिखते हुए बताया कि जैसे ही उनके वार्ड से पंचायत समिति सदस्य की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई, चुनाव लड़ने के लिए लोगों के फोन आने लगे। उनसे टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरने का आग्रह किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि इसी वर्ष उन्होंने सवाई माधोपुर में ‘डायमंड छात्रावास’ के नाम से हॉस्टल शुरू किया है। हॉस्टल में बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके ऊपर है।
दीपक सिंह गुर्जर का कहना है कि यदि वह राजनीति में चले जाते हैं तो बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इससे उन माता-पिता का भरोसा टूट सकता है, जिन्होंने विश्वास करके अपने बच्चों का हॉस्टल में दाखिला कराया है।
उन्होंने कहा कि वह किसी का भरोसा और विश्वास नहीं तोड़ सकते, इसलिए उन्होंने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है।
हर रविवार बच्चों के लिए बनता है स्पेशल खाना
दीपक सिंह गुर्जर हॉस्टल में बच्चों के भोजन को लेकर भी विशेष ध्यान देने की बात कहते हैं। उनके अनुसार, वह हर रविवार बच्चों के लिए स्पेशल खाना बनवाते हैं।
हर महीने के रविवार के लिए अलग-अलग मेन्यू तय किया गया है। पहले रविवार को खीर-पूड़ी, दूसरे रविवार को आलू परांठा और दही, तीसरे रविवार को मटर पनीर तथा चौथे रविवार को दाल-बाटी और जलेबी बनवाई जाती है।
वह हर रविवार को ‘रविवार स्पेशल’ खाने की वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने का उद्देश्य लोगों के भरोसे को बनाए रखना है।
बच्चों के माता-पिता से किया वादा निभाने की बात
दीपक सिंह गुर्जर के अनुसार, हॉस्टल शुरू करते समय उन्होंने बच्चों के माता-पिता से वादा किया था कि बच्चों को अच्छा खाना और अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराएंगे। उनका कहना है कि वह अपने इस वादे को निभा रहे हैं और इसी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
उनके इस निर्णय की चर्चा ऐसे समय में हुई है जब पंचायत समिति चुनाव में टिकट के लिए दावेदार अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
पहले भी समाज के लिए लिया था अलग फैसला
दीपक सिंह गुर्जर इससे पहले भी कुशालीदर्रा शहीद स्मारक पर कर्नल बैसला की मूर्ति को लेकर एक अलग निर्णय के कारण चर्चा में रहे थे। उन्होंने मूर्ति स्थापित होने तक माला और साफा नहीं पहनने का त्याग किया था।
बाद में कुशालीदर्रा शहीद स्मारक पर कर्नल बैसला की मूर्ति स्थापित होने के बाद उसी शहीद स्मारक पर गुर्जर समाज के सिरमौर एवं समाज के अध्यक्ष विजय बैसला के हाथों उन्होंने माला और साफा धारण किया था।
राजनीति से पहले सेवा और जिम्मेदारी का संदेश
पंचायत समिति सदस्य का चुनाव नहीं लड़ने के निर्णय को दीपक सिंह गुर्जर ने सेवा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने से जोड़ा है। उनका संदेश है कि राजनीति और समाजसेवा का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति को जो भी जिम्मेदारी मिले, उसे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से निभाना चाहिए तथा जनता और समाज के लोगों के भरोसे को कायम रखना चाहिए।
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