नवीन ग्राम पंचायत कुंसाय का गौरवशाली इतिहास


ग्राम पंचायत कुंसाय के इतिहास की कहानी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य पंडित दामोदर लाल शर्मा की जुबानी.

गंगापुर सिटी।पंकज शर्मा। ग्राम कुंसाय हिंडौन-गंगापुर मुख्य मार्ग के किनारे बसा हुआ है यह ग्राम गंगापुर सिटी से लगभग 25 किलोमीटर दूर एवं हिंडौन सिटी से 20 किलोमीटर पर मुख्य सड़क के पास बसा हुआ है गांव की आबादी लगभग 5000 से अधिक है!
ऐसा खुदाई से पता चलता है कि ग्राम कुंसाय बहुत पुराना गांव है यह गांव जैनियों का बहुत बड़ा गांव और तीर्थ स्थल रहा ! यहां 5.5 किलोमीटर तक खेतों एवं भूमि में खुदाई करने पर जैनियों की कटी-फ़टी मूर्तियां निकलती है किसी मूर्ति का हाथ काटा है तो किसी का सिर कटा है खुदाई में जैनियों के मंदिरों एवं मकान के अवशेष मिलते हैं कालांतर में यहां जैन,माली और लोहारो का बाहुल्य था!
औरंगजेब ने जैनियों के मंदिर और मूर्तियों को तोड़कर ग्रामीणों को यहां से भागने पर मजबूर कर दिया सारे मकान और मंदिरों को तोड़-तोड़कर तहस नहस कर दिया!
यह तथ्य सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं पूर्व वजीरपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष पंडित दामोदर लाल शर्मा द्वारा बताया गया जब यहां से जैन, माली आदि जातियां पलायन कर गई तो यहां देवासी ब्राह्मणों एवं एक और खेती और किसानों का यहां आकर वास हुआ!
देवासी ब्राह्मण शक्तिशाली और जमीनों के मालिक थे दूसरी जाति निर्धन एवं जमीन जायदाद से वंचित थी देवासी ब्राह्मण जागीरदारों की तरह रहते और व्यवहार करते थे चाहे जब दूसरी जाति वालों को परेशान कर कंदराओं में बांधकर दंड देते थे कुछ समय तक यह कंदराएं बनी हुई थी अब जरूर वहां मकान बन गए हैं देवासी ब्राह्मणों के आतंक एवं निर्धनता के कारण दुखी होकर उन्होंने देव थी ब्राह्मणों से छुटकारा पाने के लिए उनको सपरिवार चूल से निमंत्रण दिया उन्हें गांव के पास एक बावड़ी में भोजन हेतु बुलाया गया बावड़ी के जड़ों की दीवार बनी थी निकालने को एक रास्ता था उनको बावड़ी में बिठाकर भोजन करवाया और और उनके आतंक से दुखी होकर बावड़ी में आग लगा दी सारी देवासी मारी गई कुछ औरतें जो अपने पिहारों में थी वे बच पायी! उन औरतों में एक गर्भवती महिला थी जो कामकाज एवं मजदूरी के लिए दिल्ली चली गई किसी ने बादशाह अकबर के दीवान से कहकर दरबार में कामकाज के लिए रख लिया उसके एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम बीरबल रखा गया बीरबल बहुत ही होनहार एवं चतुर एवं हाजिर जुबानी था इस तरह की प्रतिभा को देखकर दरबारी बादशाह को बताया और उसकी वाक चातुर्यता एवं हाजिर जवाबी के कारण बादशाह ने उसे अपने पास रख लिया उसको पढ़ाया लिखाया और उसे अपने नवरत्नों में स्थान दिया जो बीरबल कुंसाय के ही देवासी ब्राह्मणों में से था जहां पर बावड़ी में देवासी ब्राह्मणों को जलाया गया वह बावड़ी एवं उसके अवशेष आज भी है जैनियों के किसी बुजुर्ग कौशल किशोर के नाम से इस गांव का नाम कुंसाय रखा गया था!
गांव कुछ समय पहले तक रायपुर पंचायत में आता था जबकि पंचायत का सबसे बड़ा गांव कुंसाय था पूर्ववर्ती सरकार (कांग्रेस) के समय परिसीमन में गांव को राजनीतिक द्वेषता के कारण पावटा गददी में जोड़ने का प्रयास तत्कालीन विधायक एवं मुख्यमंत्री जी द्वारा किया गया लेकिन गुजरात के कुछ कांग्रेसी नेताओं के प्रयासो से तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं पंचायती राज मंत्री को गांव के लोगों द्वारा सच्चाई से अवगत कराया गया इस प्रकार माननीय सचिन पायलट जी द्वारा पहले से इस गांव को रायपुर पंचायत में ही रखा गया! वर्तमान भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में पुनः पंचायत बनाई गई जो राज्य सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पूर्व विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष मानसिंह गुर्जर की अनुशंसा पर कुंसाय गांव को ग्राम पंचायत का तोहफा मिला जो वास्तव में सही एवं न्यायसंगत है!
गांव का मुख्य व्यवसाय खेती एवं पशुपालन है सात अजूबों में यहां विशाल भन्ना कुआं है जहां चार चार दामों में नाव चलती थी और बिजली आने पर 100 बीघा तक पिलाई होती थी!
गांव में तंवर,जाट एवं कुशवाहा राजपूतो की बधवा की चौकी थी यहां सेंगर राजपूत रहते थे जो करौली दरबार किशोरपुर जागीरी खत्म होने पर वहां से कछवाह राजपूत निकलकर कुंसाय आए और किले पर कब्जा कर लिया जयपुर राजा के सहयोग से इसे चार पोडे की जागीर घोषित कर दी किले में श्री सीताराम जी का भव्य मंदिर था जिसे नीचे उतार लिया गया क्योंकि वहां से जागीर ठाकुर जी नीचे उतर आए किले में यहां देव जी का मंदिर है जो आज भी है लोग आज भी वहां पूजा करने जाते हैं किले में विशाल टांका था जिससे साल भर पानी काम में लिया जाता था किले के कुछ नीचे हनुमान जी एवं चावल माता का विशाल मंदिर है किशोरपुरा से आने पर यहां ठाकुर स्वराज सिंह जी जागीरदार रहे उनके छोटे भाई जीवन सिंह जी अलग से बुर्जा बना कर रहे ठाकुर सोराजसिंह जी के ठाकुर फतेह सिंह बड़े पुत्र जागीरदार रहे उनके बाद उठाकर अनूपसिंह जी रहे उनके समय जागीरी समाप्त हो गई
इस गांव में प्रसिद्ध मेड़े वाले हनुमान जी का मंदिर है यहां हर शनिवार एवं मंगलवार को मेल जैसा माहौल रहता है बीच गांव में भोमिया जी का मंदिर है,सेड माता का मंदिर एवं हीरामन बाबा का और दत्ता जी भगवान का मंदिर भी है! यहां पुराने स्कूल के पास बहुत पुराना महादेव जी का मंदिर भी स्थित है!
गांव शिक्षा का केंद्र रहा है यहां एक राजकीय महाविद्यालय एवं उम्मेद महाविद्यालय,एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा दो प्राइवेट उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं एक संस्कृत विद्यालय,एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है ! गांव में बहुत सरकारी कर्मचारी रहते हैं!गांव में वर्तमान में 6 पूरे हैं यहां के सरकारी विद्यालय के दो अध्यापक पंडित दामोदर लाल शर्मा प्रधानाध्यापक पद पर रहते हुए एवं उमाशंकर शर्मा शारीरिक शिक्षक रहते हुए अपने निष्ठा एवं ईमानदारी से कार्य करने की फलस्वरूप राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं!


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