नवीन न्यायालय परिसर के भूमि आवंटन के खिलाफ वकीलों का हल्लाबोल, हस्ताक्षर अभियान शुरू


शहर से दूर भूमि आवंटन को अधिवक्ताओं ने बताया अव्यवहारिक; सामाजिक संगठनों और आमजन से मांगा जाएगा समर्थन

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जिला एवं सत्र न्यायालय, भीलवाड़ा के नवीन परिसर हेतु आवंटित भूमि को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा आक्रोश है। इस आवंटन को निरस्त करने की मांग को लेकर न्यायालय परिसर में एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान का आगाज किया गया है।

अधिवक्ताओं का भारी समर्थन जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एडवोकेट राकेश जैन ने बताया कि इस अभियान के पहले चरण में ही लगभग 90% नियमित प्रैक्टिसरत अधिवक्ताओं ने भाग लिया है। अब तक 600 से अधिक वकील इस विरोध याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

क्यों हो रहा है विरोध? अधिवक्ता समुदाय का मानना है कि आवंटित भूमि न केवल शहर से अत्यधिक दूर है, बल्कि वहां मूलभूत सुविधाओं का भी नितांत अभाव है। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • गोपनीय प्रक्रिया: आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह से अपारदर्शी और एकपक्षीय बताया गया है।

  • जनभावना के विपरीत: शाहपुरा, गंगापुर और बिजौलिया जैसे दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले पक्षकारों के लिए इस नए स्थान तक पहुँचना अत्यंत कठिन होगा।

  • सुविधाओं का अभाव: प्रस्तावित भूमि पर आवागमन के साधन सीमित हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को परेशानी होगी।

विधिक लड़ाई की तैयारी पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद फरजन और विक्रम सिंह राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह केवल वकीलों की नहीं, बल्कि भीलवाड़ा की जनता के अधिकारों की लड़ाई है। आगामी दिनों में इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को अभ्यावेदन भेजे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी गुहार लगाई जाएगी।

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