जिला अस्पताल में इलाज के लिए भटकते फिरते है रोगी


हॉस्पिटल टाइम में भी अपने निजी क्लिनिकों में मोटी फीस लेकर रोगियों को देखते है वरिष्ठ डॉक्टर

सवाई माधोपुर 8 अक्टूबर। (राजेश शर्मा)। जिला मुख्यालय पर संचालित जिले के सबसे बड़े सामान्य चिकित्सालय में आम आदमी के लिए ईलाज कराना आसान नही है। वरिष्ठ चिकित्सकों की मन मानी ओर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की बेबसी के कारण रोगी ईलाज की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने की प्रक्रिया में पूरे हॉस्पिटल टाइम में इधर उधर भटकता रहता है, और अंत में मोटी फीस देकर संबंधित डॉक्टर को दिखाने के लिए मजबूर होता है। चिकित्सालय की ये हालत एक दिन की नहीं आम बात हो गई है।
दूर दराज से आने वाले हो या स्थानीय रोगी हो, वे ये तय कर के आते है कि उन्हें किस डॉक्टर को दिखाना है। ऐसे में अगर दूर दराज से आने वाले रोगी को संबंधित डॉक्टर चिकित्सालय में नही मिले और घंटों इधर उधर भटक ने के बाद पता चले कि अब अस्पताल का टाइम तो खत्म हो गया। अगर उसी डॉक्टर को दिखाना है तो फला मेडिकल स्टोर पर चले जाओ डॉक्टर साहब वहीं मिलेंगे, और रोगी मजबूर होकर उस डॉक्टर के निजी क्लीनिक पर जो किसी न किसी मेडिकल स्टोर के अंदर चल रहा है पर जाकर दिखाता है। यहां रोगी कई तरीके से अपनी जेब भी कटवाता है। डॉक्टर को दिखाने की फीस, जांच लिखदी तो भी डॉक्टर की मनचाही लेब पर करानी पड़ेगी उसके बाद दवाई भी उसी मेडीकल स्टोर से लेनी पड़ती है जहां डॉक्टर बैठता है।
इसी तरह का एक मामला मंगलवार को भी जानकारी में आया है। मुख्यालय से करीबन 20 किलोमीटर दूर से चलकर जिला अस्पताल में डॉक्टर गौरव जैन को दिखाने आयी एक युवती घंटों डॉक्टर के चैंबर के बाहर इंतजार करती रही। लेकिन डॉक्टर साहब काफी समय तक नहीं आए। तो मरीज पूजा के परिजन ने चेंबर में बैठे अन्य डॉक्टरो से जानकारी की तो उन्होंने कहा कि डॉक्टर खाना खाने गए हैं अभी आ जायेंगे। लेकिन अस्पताल बन्द होने के आखिरी समय तक डॉक्टर अपने चौंबर में नहीं पहुंचे और कहाँ से कब आए लेकिन समय पर पीएमओ कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कर अपने घर या क्लीनिक पर चले गए। इस बात की जानकारी तब लगी जब इस बारे में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को बताया कि डॉक्टर गौरव जैन उपलब्ध नहीं है क्या ? तो उन्होंने बताया कि वे अभी अभी अपनी प्रजेंट करके गए हैं।
इस सारे घटना क्रम की जानकारी पीड़ित रोगी पूजा नामक युवती ने मीडिया को दी, ओर अपनी पीड़ा बताई। मीडिया प्रतिनिधि ने डॉक्टर गौरव जैन से फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन डॉक्टर ने फोन रिसीव नही किया।
जब प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को घटनाक्रम बताया तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर गौरव जैन अभी अपनी उपस्थिति दर्ज कर के गए है। इसके बाद प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने डॉक्टर जैन से जानकारी ली तो डॉक्टर ने कहा बताया कि वे ढाई बजे तक वार्ड में थे। कुल मिलाकर सामान्य चिकित्सालय की हालत व्यवस्थाओं के नाम पर बहुत खराब है। रात्रि ड्यूटी के समय भी अधिकांश वरिष्ठ चिकित्सक जूनियर चिकित्सकों को छोड़ कर घर जाकर सोते बताए, ओर जब कोई सीरियस रोगी आ जाते हैं, या कोई दुर्घटना हो जाए तो घर से लौट कर आते हैं।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को चाहिए कि वे थोड़ा सख्ती से अपने दायित्व का निर्वहन कर चिकित्सालय की हालत को सुधारने में अपना योगदान दे, ताकि आम जन को समस्याओं का सामना ना करना पड़े।


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