जिला कलेक्टर मयंक मनीष की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई
डीग।अमर दीप सैन। प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित कामां रोड पर अग्रवाल धर्मशाला में कृषि विभाग डीग के तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला जिला कलेक्टर मयंक मनीष की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, पारंपरिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की उपयोगिता से अवगत कराना तथा उन्हें विभागीय योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।
जिले भर के प्रगतिशील किसानों ने लिया भाग
कार्यशाला में कृषि विभाग के संभाग एवं जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जिले भर के प्रगतिशील कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा किसानों को बदलते कृषि परिदृश्य के अनुरूप नई तकनीकों और पद्धतियों की जानकारी प्रदान की गई।
जिला कलेक्टर ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर डाला प्रकाश
कार्यशाला में अपने संबोधन के दौरान जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने किसानों को कृषि क्षेत्र में आ रहे आधुनिक बदलावों और भूमि की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन और भूमि स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों का विशेष महत्व है।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादन के साथ-साथ भूमि की गुणवत्ता बनाए रखना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की योजनाओं से कराया अवगत
कार्यक्रम के दौरान किसानों को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत संचालित योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को विभिन्न प्रकार के इनपुट्स, जैविक खाद, उन्नत बीज तथा स्प्रिंकलर आदि के उपयोग के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों को यह भी बताया गया कि वे इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर अपनी कृषि लागत को कम कर सकते हैं तथा खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।
अनुभवी किसानों ने साझा किए अपने व्यावहारिक अनुभव
कार्यशाला के दौरान पहले से प्राकृतिक खेती कर रहे अनुभवी किसानों ने भी मंच से अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभवों के माध्यम से उपस्थित किसानों को इसकी उपयोगिता और लाभों के बारे में जानकारी दी।
किसानों द्वारा साझा किए गए अनुभवों से अन्य कृषकों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता मिली तथा उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त हुई।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने समझाईं तकनीकी बारीकियां
इस तकनीकी सत्र को सफल बनाने में कृषि विभाग के अधिकारियों की महती भूमिका रही। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की तकनीकी बारीकियां समझाईं।
इसके अलावा ड्रीप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों पर मिलने वाले अनुदान की विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी भी किसानों को दी गई, ताकि वे विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक देशराज सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि उद्यान (संभाग भरतपुर) योगेश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार सुरेश कुमार मान, सहायक निदेशक महीपाल शर्मा तथा कृषि अधिकारी महेश जादौन एवं पुष्पेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं किसानों के बीच कृषि विकास, प्राकृतिक खेती और विभागीय योजनाओं को लेकर संवाद भी हुआ, जिससे किसानों को योजनाओं की बेहतर जानकारी प्राप्त हुई।
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डीग, राजस्थान
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