भीलवाड़ा चातुर्मास में जगद्गुरु रामदयालजी बोले- ज्ञान ही मिटाता है अज्ञान का अंधकार


सत्संग में जगद्गुरु रामदयालजी महाराज ने आत्मज्ञान, राम नाम और सद्गुरु की महिमा पर अमृतवर्षा करते हुए हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।

भीलवाड़ा। विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित दैनिक सत्संग में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय, शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि ज्ञान ही मनुष्य के अज्ञान का अंधकार मिटाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि केवल गंगा स्नान या सत्संग में उपस्थित हो जाने मात्र से जीवन नहीं बदलता, बल्कि जब सत्संग हृदय में उतरता है तभी पुण्य के द्वार खुलते हैं और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु वचनों का श्रवण किया। आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्ञान है और उसका अंत केवल ज्ञान, आत्मबोध तथा सद्गुरु की कृपा से ही संभव है। बाहरी आडंबर और कर्मकांड से अधिक आवश्यक आत्मचिंतन और आत्मजागृति है।

श्रीकृष्ण को बताया जगद्गुरु, अर्जुन को आदर्श शिष्य

जगद्गुरु रामदयालजी महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से समस्त मानवता को ज्ञान का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि संसार में श्रीकृष्ण जैसा जगद्गुरु और अर्जुन जैसा आदर्श शिष्य दूसरा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए सबसे पहले स्वयं को पहचानना आवश्यक है। जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन का उद्देश्य अधूरा रहता है।

राम नाम को बताया जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

आचार्यश्री ने कहा कि भगवान का नाम ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन के प्रत्येक कार्य के केंद्र में राम नाम हो तो मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि भगवान और भगवान का नाम यदि साथ हो तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सहज हो जाती हैं। राम नाम का स्मरण मनुष्य को भय, मोह और जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करने की शक्ति प्रदान करता है।

दुःख भी ईश्वर का सकारात्मक संदेश

सत्संग में उन्होंने कहा कि मनुष्य सुख के समय ईश्वर को भूल जाता है, लेकिन दुःख उसे परमात्मा के निकट ले जाता है। उन्होंने कहा कि पीड़ा, अभाव और संघर्ष भी परमात्मा के सकारात्मक संदेश हैं, जो मनुष्य को आत्ममंथन और ईश्वर की ओर प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन का अंतिम क्षण भी यदि भगवान के स्मरण में बीते तो मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है।

सद्गुरु ही दिखाते हैं मुक्ति का मार्ग

जगद्गुरु रामदयालजी महाराज ने कहा कि सद्गुरु केवल उपदेश देने वाले नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा दिखाने वाले होते हैं। सद्गुरु शिष्य के जीवन में ज्ञान का दीप प्रज्वलित कर उसे अज्ञान से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्ञान वही है जो अज्ञान को समाप्त करे और मनुष्य को संसार के बजाय उसके सृष्टिकर्ता की ओर ले जाए।

मानस प्रवचन और भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण

सत्संग से पूर्व संत मनोरथरामजी महाराज (आलोट) ने श्रीरामचरितमानस पर आधारित प्रवचन प्रस्तुत किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भजनों की मधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज की आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया। भीलवाड़ा सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सत्संग में शामिल हुए।

प्रतिदिन हो रहे हैं आध्यात्मिक आयोजन

विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः रामधुनी एवं वाणीजी का पाठ, दैनिक सत्संग तथा सायंकाल संध्या आरती का आयोजन किया जा रहा है। इन आध्यात्मिक आयोजनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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