वल्लभ कुल शिरोमणि तिलकायत श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा की प्रेरणा से नाथुवास गौशाला के सम्मुख श्री हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार
श्री विशाल बावा के कर-कमलों द्वारा वैदिक विधि-विधान से हुआ शुभारंभ
“प्रभु की गौ माता के सनातन काल से ही हैं श्री हनुमान जी रक्षक… श्री विशाल बावा”
“पुष्टिमार्ग में प्रभु की सेवा में भक्त के रूप में श्री हनुमान जी का है विशेष महत्व… श्री विशाल बावा”
नाथद्वारा। (के के ग्वालजी) वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथ जी की हवेली के अंतर्गत प्रभु की नाथुवास स्थित गौशाला के सम्मुख स्थित प्राचीन श्री हनुमान मंदिर, जो गौशाला की स्थापना के समय से ही गौ माता के रक्षक के रूप में विशेष मान्यता रखता है, हाल ही में एक दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गया था। जीर्णोद्धार की आवश्यकता को देखते हुए श्री तिलकायत हुजूर की आज्ञा व श्री विशाल बावा की प्रेरणा से मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार किया जा रहा है। आज दिनांक 23/04/2026, गुरुवार, नि.ली.गो.श्री लाल गिरधारी जी के उत्सव के शुभ अवसर पर नाथुवास गौशाला के सम्मुख श्री हनुमान जी के मंदिर का श्री विशाल बावा द्वारा वैदिक विधि-विधान से पूजन कर जीर्णोद्धार का शुभारंभ किया गया। मंदिर के पंड्या जी परेश नागर द्वारा विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया गया। इस अवसर पर श्री विशाल बावा ने अपने उद्बोधन में गौ माता एवं पुष्टिमार्ग में श्री हनुमान जी के गौ माता के रक्षक के रूप में संबंध व महत्व का विस्तारपूर्वक भाव प्रकट किया।
श्री विशाल बावा ने अपने प्रवचन में कहा:
“भक्त और भगवान का शाश्वत संबंध गौ-प्रतिपालक प्रभु के रक्षक के रूप में है, श्री हनुमान जी का जिसमें विशेष रूप से पुष्टिमार्ग के हृदयस्थल श्री नाथद्वारा की पावन धरा पर प्रभु श्री गोवर्धननाथ और उनके अनन्य भक्त श्री हनुमान जी का संबंध अटूट है। त्रेता में राम-काज, द्वापर में कृष्ण-लीला और अब इस कलि काल में श्रीजी की सेवा—श्री हनुमान जी हर युग में प्रभु के संकल्पों को सिद्ध करने के लिए तत्पर रहे हैं।
1. पुष्टिमार्ग में प्राकट्य और संकल्प की सिद्धि
प्रभु गोवर्धननाथ का श्री गिरिराज जी की कंदरा से प्राकट्य मात्र एक अलौकिक घटना नहीं, अपितु कोटि-कोटि दैवीय कार्यों की सिद्धि का मूल है। प्रभु जब-जब धरा पर अवतरित होते हैं, उनके अतिप्रिय जनों और जीवों के रक्षण का उत्तरदायित्व स्वयं श्री हनुमान जी वहन करते हैं। पुष्टिमार्ग की सेवा प्रणाली में जहाँ भाव प्रधान है, वहाँ हनुमान जी की उपस्थिति अटूट सुरक्षा कवच की भाँति है।
2. गौ-सेवा का दिव्य अनुबंध: ब्रज से मेवाड़ तक
प्रभु को अपनी गौ-माता अत्यंत प्रिय हैं। ब्रज की कुंज गलियों से लेकर मेवाड़ के अरावली शिखरों तक, प्रभु की गैया के रक्षण का भार श्री बजरंगबली ने ही उठाया है।
– ब्रज का स्वरूप: श्री गिरिराज जी की तलहटी में विराजित ‘श्री पूंछरी के लोटे वाले बाबा’ स्वयं हनुमान जी के अवतार माने जाते हैं। मान्यता है कि वे प्रभु श्री गोवर्धननाथ जी के बालस्वरूप के भक्त हैं और प्रभु की गैया चराने और उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
– मेवाड़ में वही रक्षक स्वरूप आज नाथद्वारा (सिंहाड़) के द्वार पर ‘सिंहाड़ हनुमान जी’ के रूप में विद्यमान है, जो प्रभु के मंदिर और उनकी नगरी की पहरेदारी कर रहे हैं।
3. गौशालाओं के रक्षक: स्वयंभू संकटमोचन
नाथद्वारा के आसपास स्थित प्रभु की विशाल गौशालाओं के समीप हनुमान जी का स्वयंभू प्रकट होना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जहाँ प्रभु की प्रिय गैया होंगी, वहाँ भक्त शिरोमणि हनुमान जी सदैव उपस्थित रहेंगे। चाहे वह गैया को चराना हो या हिंसक जीवों से उनका रक्षण, हनुमान जी ने हर कालखंड में इस सेवा को अपना परम सौभाग्य माना है।
4. नाथद्वारा के सुरक्षा प्रहरी
पुष्टिमार्गीय परम्परा और मर्यादा को अक्षुण्ण रखने के लिए श्रीनाथद्वारा शहर में प्रवेश के सभी प्रमुख द्वारों पर महाबली हनुमान जी का कड़ा पहरा है। यह व्यवस्था दर्शाती है कि प्रभु की इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता, और प्रभु की आज्ञा से हनुमान जी भक्तों और गौ-वंश के रक्षक बनकर हर द्वार पर खड़े हैं।
त्रेता के रामभक्त और द्वापर के सखा हनुमान, आज कलि काल में श्रीजी के अनन्य सेवक बनकर पुष्टिमार्ग की सेवा-रीति को सुदृढ़ कर रहे हैं। यह मिलन केवल भक्ति का नहीं, बल्कि ‘स्वामी और सेवक’ के उस दिव्य प्रेम का है, जो युगों-युगों से चला आ रहा है। इसलिए आज श्री हनुमान जी के मंदिर के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है जो श्री तिलकायत हुजूर की आज्ञा से पूर्ण हो रहा है क्योंकि श्री हनुमान जी गौ माता की सेवा में शाश्वत आज भी नाथुवास गौशाला व प्रभु की सभी गौशाला के सम्मुख विराज कर गौ माता के रक्षक के रूप में सेवारत हैं।” … श्री विशाल बावा
इस अवसर पर मंदिर के अधिकारी जी श्री सुधाकर शास्त्री, श्रीनाथजी मंदिर के मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, मंदिर मंडल के सीईओ श्री जितेंद्र पांडे, मंदिर मंडल सदस्य श्री सुरेश भाई सांगवी, श्री समीर चौधरी, सहायक अधिकारी श्री अनिल सनाढ्य, तिलकायत श्री के सचिव लीलाधर पुरोहित, समाधानी उमंग मेहता, मंदिर मंडल के श्री कैलाश पुरोहित, मंत्राक्ष नागर, जमादार विट्ठल सनाढ्य, कैलाश पालीवाल, भावेश पटेल, नितिन पानेरी, नाथुवास गौशाला के हेड ग्वाल दिलीप गुर्जर, विजय गुर्जर, प्रवीन गुर्जर,कल्पित, देवेश, आदि मंदिर सेवक उपस्थित थे।