राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम का दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन संपन्न, पारदर्शी स्थानांतरण नीति और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग
सवाई माधोपुर। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ, जिला शाखा सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन के द्वितीय दिवस का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों एवं शिक्षकों ने विभिन्न शिक्षक समस्याओं एवं शैक्षिक मुद्दों पर सामूहिक चर्चा की। चर्चा के बाद शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को शामिल करते हुए 22 सूत्रीय मांग-पत्र तैयार कर राज्य सरकार को निस्तारण के लिए भिजवाया गया।
शिक्षकों की समस्याओं पर हुआ सामूहिक मंथन
द्वितीय दिवस के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार वर्मा रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष देशराज मीना ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला संरक्षक मोहम्मद जाकिर, जिला सभाध्यक्ष प्रदीप भारद्वाज, जिला मंत्री ओमप्रकाश मीणा, जिला सलाहकार पारस चंद जैन, अब्दुल वसीम जिला संघर्ष समिति संयोजक, जिला कोषाध्यक्ष मोहसिन खान एवं जिला प्रवक्ता विनोद जैन, बौंली ब्लॉक अध्यक्ष जहीर अली, चौथ का बरवाड़ा ब्लॉक अध्यक्ष पिंकेश बैरागी, सवाई माधोपुर ब्लॉक अध्यक्ष विजेंद्र फागना, मुकेश सिंह गुर्जर, जाकिर खान बौंली, पप्पूलाल मीना, भंवर हेमंत सिंह और पवन जैन सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
पदाधिकारियों ने शिक्षक हितों को लेकर रखे विचार
जिलाध्यक्ष राहुल सिंह गुर्जर ने कहा कि संगठन शिक्षक हितों के लिए निरंतर सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है। जिले के शिक्षकों की समस्याओं को चिन्हित कर संबंधित अधिकारियों एवं राज्य सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से संगठन की मजबूती एवं एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।
प्रदेश उपाध्यक्ष कन्हैयालाल सैनी ने कहा कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। जिला स्तर की समस्याओं को जिला अधिकारियों के समक्ष तथा राज्य स्तर की समस्याओं को राज्य सरकार के समक्ष मांग-पत्र के माध्यम से रखा जाएगा।
निवर्तमान जिलाध्यक्ष एवं जिला संरक्षक मोहम्मद जाकिर ने संगठन के पूर्व संघर्षों एवं गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन ने हमेशा शिक्षक हितों को प्राथमिकता दी है।
जिला सलाहकार पारस चंद जैन ने कहा कि शैक्षिक सम्मेलन शिक्षकों की समस्याओं को सामूहिक रूप से सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच है।
राज्य सरकार को भेजा 22 सूत्रीय मांग-पत्र
शिक्षक संघ की ओर से तैयार 22 सूत्रीय मांग-पत्र में विभिन्न शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यालय संबंधी मुद्दों को शामिल किया गया। इनमें प्रमुख रूप से 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की गई।
इसके अलावा तृतीय श्रेणी शिक्षकों, प्रबोधकों एवं शारीरिक शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने तथा तृतीय श्रेणी शिक्षकों सहित समस्त शिक्षक संवर्ग की डीपीसी शीघ्र करने की मांग रखी गई।
RGHS और संविदा कर्मियों से जुड़ी मांगें
मांग-पत्र में RGHS योजना में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूर्व की भांति सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग की गई। वहीं पंचायत शिक्षक, विद्यालय सहायक, संविदा शिक्षक, शिक्षाकर्मी, पैराटीचर सहित अन्य संविदा कर्मियों को स्थायी कर्मचारी घोषित करने की मांग भी शामिल की गई।
विद्यालय सहायकों को उनकी बीपीएड एवं सीपीएड योग्यता तथा सेवा अनुभव को मान्यता देते हुए पंचायत शिक्षक पद पर पात्र मानकर समायोजन करने की मांग रखी गई।
स्कूलों में कंप्यूटर और प्रिंटर उपलब्ध कराने की मांग
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ऑनलाइन कार्य संपादन के लिए कंप्यूटर, लैपटॉप एवं प्रिंटर हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध करवाने की मांग की गई।
गर्मी को देखते हुए विद्यालय समय में परिवर्तन कर 1 नवंबर से प्रातः 10 बजे से शाम 4 बजे तक किए जाने की मांग भी मांग-पत्र में रखी गई।
वेतन विसंगति दूर करने और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग
मांग-पत्र में 2007-08 में नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों एवं प्रबोधकों की वेतन विसंगति दूर कर एक वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग की गई।
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने, प्रतियोगी परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी एक ही पारी में लगाने और परीक्षा ड्यूटी का मानदेय समय पर शिक्षकों के खातों में जमा करवाने की मांग रखी गई।
जनगणना कार्य में लगे प्रगणक, पर्यवेक्षक एवं अन्य कार्मिकों के मानदेय का शीघ्र भुगतान करवाने की मांग भी की गई।
पे-प्रोटेक्शन और इंटर्नशिप वेतन कटौती का मुद्दा
तृतीय श्रेणी शिक्षक से सीधी भर्ती द्वारा अन्य उच्च पदों पर नियुक्त एवं अन्य विभाग से तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर नियुक्त कार्मिकों के पे-प्रोटेक्शन आदेश को प्रत्यावर्तित करने की मांग की गई।
वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षक बीएसटीसी, जो पत्राचार से बीएड कर रहे हैं, उनके इंटर्नशिप अवधि के वेतन कटौती आदेश को वापस लेने की मांग रखी गई।
व्याख्याता और शारीरिक शिक्षक पद सृजित करने की मांग
मांग-पत्र में अनिवार्य अंग्रेजी एवं अनिवार्य हिंदी विषय के व्याख्याता पद सृजित करने की मांग की गई। पोषाहार कार्य में लगाए गए कुक-कम-हेल्पर का मानदेय बढ़ाने की मांग भी रखी गई।
सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक के पद सृजित कर शारीरिक शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर उपलब्ध करवाने की मांग की गई।
विगत तीन वर्षों में क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक एवं व्याख्याता के पद स्वीकृत करने की मांग भी मांग-पत्र में शामिल रही।
क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण और ग्रांट की मांग
अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों एवं कक्षा-कक्षों के पुनर्निर्माण के लिए शीघ्र बजट उपलब्ध करवाने तथा राशि एसडीएमसी/एसएमसी के खातों में डालने की मांग की गई।
इसके साथ ही सीएसजी ग्रांट की राशि बढ़ाने एवं सत्र के प्रथम माह में विद्यालयों को उपलब्ध करवाने की मांग भी रखी गई।
ग्रामीण भत्ता और पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा
मांग-पत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ता देने की मांग की गई।
वहीं वर्ष 2004 के बाद चयनित शिक्षकों, प्रबोधकों एवं कर्मचारियों की NPS राशि GPF में जमा करवाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने की मांग भी राज्य सरकार के समक्ष रखी गई।
इन सभी मांगों वाला 22 सूत्रीय मांग-पत्र राज्य सरकार को निस्तारण हेतु भिजवाया गया।
सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का किया सम्मान
सम्मेलन के दौरान संगठन के सेवानिवृत्त पदाधिकारियों महावीर सोनी, रमेशचंद वर्मा, जसराज सिंह चौहान, रामधन मीना, रामसहाय बैरवा, शकील अहमद, महेश गोयल, कमल किशोर शर्मा, ताराचंद रैगर, नारायण दास स्वामी, नोनन्द सिंह राजावत, नंदकिशोर शर्मा, गौरीशंकर शर्मा एवं ग्यारसी लाल वर्मा को संगठन एवं शिक्षक हित में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
वहीं संगठनात्मक गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दामोदर वर्मा को भी सम्मानित किया गया।
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Gangapur City, Rajasthan
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