शंकरगढ़ सीएचसी में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पर सवाल, जांच की मांग


राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की दो टीमों के स्कूल भ्रमण और रिपोर्टिंग पर उठे सवाल, गाड़ियों के तेल खर्च, मेंटेनेंस और पिछले छह महीने के रिकॉर्ड की जांच की मांग

प्रयागराज।सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंच रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है। प्रयागराज के शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कार्यक्रम के तहत गठित टीमें नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंच रही हैं और स्वास्थ्य परीक्षण से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई गई है।

दो टीमें, चार डॉक्टर और दो सरकारी गाड़ियां

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शंकरगढ़ सीएचसी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दो टीमें गठित हैं। नियमानुसार प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर और दो पैरामेडिकल कर्मचारी सहित चार सदस्य होने की जानकारी दी गई है। दोनों टीमों के लिए अलग-अलग दो सरकारी गाड़ियां भी नियुक्त हैं।

इन टीमों का मुख्य कार्य क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना है। जांच के दौरान बीमारियों से प्रभावित बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार के लिए रेफर करना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में टीमों की नियमित उपस्थिति, बच्चों की जांच और जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना कार्यक्रम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक है।

स्कूलों में टीमों के भ्रमण और रिपोर्टिंग पर सवाल

सूत्रों के हवाले से आरोप लगाया गया है कि आरबीएसके की टीमें स्कूलों में नियमित रूप से नहीं पहुंचती हैं। आरोप है कि कभी-कभार विद्यालयों का दौरा करने के बाद औपचारिकता पूरी कर ली जाती है और एक दिन के भ्रमण के आधार पर पूरे सप्ताह की रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है।

दावा यह भी है कि बच्चों की जांच, बीमार पाए गए बच्चों की संख्या और अन्य गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट वास्तविक स्थिति के अनुरूप तैयार नहीं हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच होना अभी बाकी है।

कुछ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कथित तौर पर बताया कि स्वास्थ्य टीमें कभी-कभार ही आती हैं। उनके अनुसार, टीम के आने पर भी सीमित औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और नियमित गतिविधियों की रिपोर्टिंग को लेकर सवाल बने हुए हैं।

यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और सरकारी कार्यक्रम की निगरानी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला होगा।

गाड़ियों के तेल और मेंटेनेंस के खर्च पर उठे सवाल

आरबीएसके की दोनों टीमों के लिए सरकारी गाड़ियां उपलब्ध हैं। इन वाहनों के संचालन के लिए डीजल या तेल तथा रखरखाव पर खर्च होने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि टीमें नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा नहीं कर रही हैं, तो वाहनों के उपयोग और ईंधन खर्च का सत्यापन किस प्रकार किया जा रहा है।

मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि दोनों गाड़ियों की लॉग बुक कौन जांचता है और दर्ज यात्राओं का वास्तविक स्कूल भ्रमण से मिलान कैसे किया जाता है। खर्च की वास्तविक राशि और किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकती है।

इसलिए वाहनों की लॉग बुक, ईंधन बिल, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और स्कूल भ्रमण से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कराया जाना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ या नहीं।

आरबीएसके टीम की जवाबदेही किसकी?

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण अभियान में टीमों की नियमित निगरानी और रिपोर्टों का सत्यापन जरूरी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि शंकरगढ़ सीएचसी में टीमों की गतिविधियों की समीक्षा किस स्तर पर होती है और स्कूलों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है या नहीं।

सीएचसी प्रशासन की भूमिका, टीमों की उपस्थिति और उनके कामकाज की निगरानी व्यवस्था को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। हालांकि, सीएचसी अधीक्षक या संबंधित अधिकारियों की जानकारी और इस मामले में उनका पक्ष उपलब्ध नहीं है।

यदि रिपोर्टिंग में अनियमितता या सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

पिछले छह महीने की जांच कराने की मांग

क्षेत्र के अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से जिलाधिकारी प्रयागराज तथा मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।

मांग में आरबीएसके की दोनों टीमों की पिछले छह महीने की जीपीएस लोकेशन, स्कूल भ्रमण रजिस्टर और वाहनों की तेल संबंधी लॉग बुक की जांच शामिल है। इसके साथ ही टीमों की उपस्थिति, निर्धारित रोस्टर के अनुसार विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में किए गए स्वास्थ्य परीक्षण तथा तैयार की गई रिपोर्टों का मिलान कराने की जरूरत बताई गई है।

ऐसी जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि टीमें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार क्षेत्र में पहुंचीं या नहीं, बच्चों की वास्तविक जांच कितनी हुई और सरकारी वाहनों पर किए गए खर्च का रिकॉर्ड वास्तविक गतिविधियों से मेल खाता है या नहीं।

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजना की निगरानी जरूरी

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करना और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद करना है। ऐसे में कार्यक्रम की सफलता केवल कागजी रिपोर्टों से नहीं, बल्कि बच्चों तक पहुंचने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और वास्तविक जांच के आधार पर आंकी जानी चाहिए।

शंकरगढ़ सीएचसी में उठे सवालों के बीच संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं और आवश्यक रिकॉर्ड का सत्यापन करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो तथा जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार मिल सके।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *