कौंधियारा पशु चिकित्सालय उपेक्षा का शिकार इलाज के लिए भटक रहे ग्रामीण


डॉक्टर व स्टाफ नदारत गेट पर लटक रहा ताला

सिर्फ कागज़ों में संचालित हो रहा है अस्पताल

प्रयागराज। कौंधियारा क्षेत्र का एकमात्र पशु चिकित्सालय इन दिनों पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुका है। मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे जब ग्रामीण अपने बीमार मवेशियों को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। अस्पताल पूरी तरह वीरान पड़ा था। न कोई डॉक्टर मिला, न ही कोई सहायक कर्मी। स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल परिसर में चारों ओर कूड़े-कचरे के ढेर, उगी झाड़ियाँ और टूटी फर्श इसकी बदहाली को साफ बयां करते हैं। शौचालय पूरी तरह जर्जर है, न पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही बैठने की जगह। मच्छरों का इतना प्रकोप है कि संक्रमण फैलने का खतरा मंडरा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल कागज़ों में तो संचालित है, लेकिन असल में इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। बरसात के मौसम में मवेशियों में बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं, ऐसे में इलाज न मिल पाना किसानों के लिए भारी मुसीबत बन गया है। मजबूरी में उन्हें निजी डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में कई महीनों से टीकाकरण अभियान भी बंद पड़ा है। पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करना भी मुश्किल है – फोन या तो बंद रहता है या उठाया नहीं जाता। क्षेत्रीय पंचायत सदस्य सहित ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन इस ओर तत्काल ध्यान दे और अस्पताल को सुचारु रूप से संचालित कराने की व्यवस्था करे।


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