घी में पाम ऑयल और दूध में डिटर्जेंट: मुनाफाखोरों के लिए ‘चिल्लर’ है सरकारी जुर्माना, अब चाहिए उम्रकैद जैसा सख्त कानून
प्रयागराज। राजदेव द्विवेदी: आपकी थाली में सजा भोजन आज केवल भूख मिटाने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर में घुलने वाला ‘स्लो पॉइजन’ (धीमा जहर) बन चुका है। दूध में डिटर्जेंट, घी में पाम ऑयल, हलवे में जहरीले केमिकल्स और मसालों में रंगीन कचरा—यह फेहरिस्त बहुत लंबी है। सवाल यह उठता है कि आखिर इस खतरनाक मिलावटखोरी पर पूर्ण विराम कब लगेगा?
भरोसे के नाम पर बिकता जहर
बाजार में मिलने वाले घी, तेल, मसाले, आटा, चावल और दाल जैसे लगभग हर बुनियादी खाद्य पदार्थ में मिलावट की शिकायतें अब आम हो चुकी हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ये उत्पाद अक्सर नामी ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचे जाते हैं, जिससे आम उपभोक्ता ‘शुद्धता’ के झूठे भरोसे में आकर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर बैठता है।
क्यों फल-फूल रहा है मिलावट का काला कारोबार?
इस संकट के पीछे तीन प्रमुख कारण नजर आते हैं:
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अंधा मुनाफा: व्यापारी चंद रुपयों के लालच में गुणवत्ता से समझौता कर हानिकारक पदार्थ मिला रहे हैं।
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कमजोर निगरानी तंत्र: सरकारी तंत्र में संसाधनों की कमी और भ्रष्टाचार मिलावटखोरों के लिए कवच का काम करता है।
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जागरूकता का अभाव: आम जनता के पास मिलावट पहचानने के न तो साधन हैं और न ही वे कानूनी पचड़ों में पड़ना चाहते हैं।
जुर्माना नहीं, अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की जरूरत
जब भी कोई मामला सामने आता है, प्रशासन का रटा-रटाया जवाब होता है—”अभियान चल रहा है, नमूने लिए जा रहे हैं।” लेकिन सच्चाई यह है कि करोड़ों कमाने वाले मुनाफाखोरों के लिए कुछ हजार या लाख रुपये का जुर्माना ‘चिल्लर’ के समान है। बिना लाइसेंस के धंधा और पकड़े जाने पर ‘सेटिंग’ का खेल इस पैटर्न को जिंदा रखे हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिलावटखोरी को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में नहीं डाला जाएगा और संपत्ति कुर्क व उम्रकैद जैसी कठोर सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक हमारी थाली से यह जहर खत्म नहीं होगा।
आपकी थाली, आपकी जिम्मेदारी
भोजन केवल व्यापार नहीं, जीवन का आधार है। यदि समाज में नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना नहीं जागी, तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर बीमारियों की चपेट में होंगी। अगली बार निवाला तोड़ने से पहले खुद से पूछिए—आप स्वाद ले रहे हैं या धीमा जहर?
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2008 से लगातार पत्रकारिता कर रहे हैं। 2008 से 2019 तक सर्वोदय वार्ता, सर्वोदय वार्ता मैगजीन में। 2020 से 2021 तक इंडियन लाइव टीवी में । 2021 से 2023 तक दैनिक समाचार पत्र पूर्वांचल स्वर प्रयागराज में। 2023 से 2024 तक दैनिक समाचार पत्र लक्ष्मण नगर जंक्शन में। 2024 से अब तक लगातार दैनिक समाचार पत्र लक्ष्य सामग्र में। 2021 से अब तक आवाज आपकी न्यूज़ पोर्टल में पत्रकार हैं।